निस्केयर में हिन्दी दिवस समारोह 2011 का आयोजन

 

प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी संस्थान मं हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में हिन्दी मास का आयोजन किया गया। यह मास 14 सितम्बर से 14 अक्टूबर 2011 तक चला। हिन्दी मास का आरम्भ संस्थान के सभी कार्मिकों से हिन्दी में कार्य करने की अपील के साथ हुआ। मास पर्यन्त विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गयी जिनका उद्देश्य न केवल हिन्दी मास आयोजन था बल्कि हिन्दी में कार्य करने के प्रति सभी कार्मिकों को सजग बनाने का भी था। जिन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। वे इस प्रकार हैं 1. हिन्दी नोटिंग/ड्रॉफ्टिंग प्रतियोगिता 2. वाद-विवाद प्रतियोगिता जिसका विषयः अन्ना का जनआन्दोलन - कितना सही, कितना गलत था। 3. कविता पाठ प्रतियोगिता, इस प्रतियोगिता में कुछ कार्मिकों ने स्वरचित कविताओं का भी पाठ किया तथा 4.निबन्ध लेखन प्रतियोगिता - यह प्रतियोगिता हिन्दी भाषी तथा हिन्दीतर भाषी कार्मिकों के लिए अलग-अलग आयोजित की गयी। इस प्रतियोगिता का विषय था - क्या लोकपाल/लोकायुव्त की नियुव्ति से भ्रष्टाचार का अन्त सम्भव है। 5. प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता - इस प्रतियोगिता में सामान्य ज्ञान/विज्ञान पर आधारित प्रश्न पूछे गये। इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों का उत्साह दर्शनीय था। 6. अन्ताक्षरी प्रतियोगिता - संस्थान के कार्मिकों ने इस प्रतियोगिता में खूब बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। टीम इवेन्ट के रूप में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता तथा अन्ताक्षरी प्रतियोगिता संस्थान के कार्मिकों के मध्य बहुत लोकप्रिय हो चुकी हैं।

 

हिन्दी मास के अवसर पर 14 अक्टूबर 2011 को एक समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध हास्य कवि बाबा कानपुरी को कविता पाठ के लिए मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया।

 

समारोह का आरम्भ मुख्य अतिथि द्वारा दीप-प्रज्ज्वलित कर किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात श्रीमती दीक्षा बिष्ट, प्रमुख, राजभाषा द्वारा राजभाषा रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने गतवर्ष की राजभाषा गतिविधियों तथा उपलब्धियों के विषय में जानकारी दी तथा संस्थान के प्रशासन के सभी अधिकारियों तथा कार्मिकों को उनके अतुल्य सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को भविष्य में भी अपना सहयोग इसी प्रकार बनाए रखने के लिए निवेदन किया।

 

इसके पश्चात निदेशक, निस्केयर ने उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में उन्होंने संस्थान के निदेशक के रूप में इस समारोह में अपनी उपस्थिति तो दर्ज करायी ही है साथ ही हिन्दीतर भाषी क्षेत्र से होने के बावजूद भी हिन्दी में कार्य करना सीख लिया है। उन्होंने हिन्दी को सम्पर्क भाषा के रूप में विशेष लोकप्रिय बताते हुए अपने संस्थान में इसके अनुपालन के प्रति सजगता बरतने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य संस्थानों की तुलना में हमारे संस्थान में सरकारी कामकाज में हिन्दी की स्थिति कहीं अधिक अच्छी है।

 

श्रीमती मीनाक्षी गौड़, अनुवादक ने मुख्य अतिथि का परिचय देते हुए बताया कि बाबा कानपुरी, जिनका मूल नाम श्री सन्तोष कुमार शर्मा है, को बाबा कानपुरी की उपाधि कानपुर विश्वविद्यालय के उपकुलपति ने प्रदान की थी। बाबा कानपुरी हास्य व्यग्य के क्षेत्र में 45 वर्षों का सफर पूर्ण कर चुके हैं तथा राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हैं। उन्होंने काव्य की सभी प्रचलित विधाओं - यथा गीत, गजल, दोहा, कुण्डली, धनाक्षरी, कविताओं का श्रेष्ठ सृजन किया है तथा उनके बहुत-सी पत्र-पत्रिकाओं में कॉलम छपते रहते हैं। वे लेखन के अतिरिव्त विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से निरन्तर समाज सेवा तथा साहित्य सेवा के प्रति समर्पित हैं। पैंतालीस वर्षों की काव्य यात्रा में अब तक इनकी बहुत-सी पुस्तकें - बाबा कवि बर्राय, पीछे से खुली खिड़की, गजल संग्रह इत्यादि प्रकाशित हो चुके हैं।

 

बाबा कानपुरी ने अपने सम्बोधन में संस्थान में सरकारी कामकाज में हिन्दी के प्रयोग के प्रति अपने विचार व्यव्त करते हुए कहा कि निस्केयर में आकर उन्होंने यह अनुभव किया है कि संस्थान में अन्य संस्थानों से हिन्दी प्रयोग की स्थिति कहीं अधिक अच्छी है तथा सभी कार्मिक समर्पित भाव से हिन्दी का प्रयोग करते हैं। उन्होंने अपनी कविताओं से उपस्थित जनसमूह का मनोरंजन किया। सभी ने उनकी कविताओं की सराहना की।

 

प्रशासन नियंत्रक महोदय ने इस अवसर पर कहा कि इस संस्थान में उनका अनुभव बहुत अच्छा रहा है तथा वे सभी कार्मिकों से आशा करते हैं कि वे प्रशासनिक कार्यों में हिन्दी का प्रयोग अधिकाधिक करेंगे।

 

इसके पश्चात मुख्य अतिथि, निदेशक महोदय प्रशासन नियंत्रक तथा वित्त एवं लेखा अधिकारी द्वारा हिन्दी मास के दौरान आयोजित की गयी प्रतियोगिताओं के विजेताओं तथा वर्ष भर हिन्दी में कार्य करने वाले कार्मिकें को नकद पुरस्कार प्रदान किये गये।

 

अन्त में डॉ. ज्ञानेन्द्र मिश्रा, वित्त एवं लेखा अधिकारी ने हिन्दी में कार्य करने वाले संस्थान के कार्मिकों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए अन्य से भी हिन्दी में कार्य करने के लिए आग्रह किया। उनके धन्यवाद प्रस्ताव के साथ समारोह सम्पन्न हुआ।