डॉ. मनोज कुमार पटैरिया, निदेशक, सीएसआईआर-निस्केयर

 

डॉ. मनोज कुमार पटैरिया ने सीएसआईआर राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं सूचना स्रोत संस्थान (निस्केयर),नई दिल्ली के निदेशक के रूप में पदभार ग्रहण किया है। इससे पूर्व डॉ. पटैरिया प्रसार भारती (दूरदर्शन/आकाशवाणी) के अपर महानिदेशक थे जहां उन्होंने भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में किसान टीवी चैनल की शुरूआत की। उन्होंने डीडी किसान चैनल के प्रमुख के रूप में भी कार्य किया।

 

एक कुशल वैज्ञानिक एवं विज्ञान संचारक, डॉ. पटैरिया ने प्रसार भारती में नियुव्ति से पूर्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार में सलाहकार/वैज्ञानिक-जी के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान कीं।

 

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, आविष्कार एवं मानविकी  परिप्रेक्ष्यों के विभिन्न क्षेत्रों में  प्रशिक्षित डॉ. पटैरिया ने जैविक विज्ञान में एम एससी एवं पीएच डी तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार में एम एससी - टैक, मानव संसाधन विकास में एमबीए तथा पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, आदि उपाधियां प्राप्त कीं। इन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय, संयुव्त राज्य अमेरिका में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति का अध्ययन किया।

 

डॉ. पटैरिया को अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए गए हैं जिनमें शामिल हैं: सेंटर फॉर ग्लोबल स्टडीज, ह्यूस्टन संयुव्त राज्य अमेरिका द्वारा ग्लोबल साइंस पॉपुलराइजेशन पुरस्कार; गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पुरस्कार; मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा डॉ. आत्माराम पुरस्कार; सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार; कृषि मंत्रालय द्वारा चौधरी चरण सिंह पुरस्कार तथा भारतीय विज्ञान कांग्रेस द्वारा डॉ. बी.सी. देब पुरस्कार  आदि।  इनमें से अनेक पुरस्कार उन्हें भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा, डॉ. .पी.जे. अब्दुल कलाम, श्रीमति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल, तत्कालीन उपराष्ट्रपति श्री भैरों सिंह शेखावत तथा हाल ही में भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी द्वारा प्रदान किये गए।

 

डॉ. पटैरिया की अनुसंधान एवं नवाचारों में रुचि रही है और इन्होंने अनेक वैज्ञानिक उपकरण, प्रोटोटाइप तथा शैक्षिक सामग्री विकसित करने के अलावा नए आविष्कारों हेतु दो भारतीय पेटेंट भी प्राप्त किए हैं। उन्होंने अनुसंधान एवं विकास संस्थानों, विश्वविद्यालयों और अन्य सरकारी, गैर सरकारी एवं अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग से अनेक अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं की संकल्पना की एवं उन पर कार्य किया है। इन्होंने अनेक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए। नए शैक्षिक कार्यक्रमों का सृजन किया। विज्ञान संचार एवं विज्ञान अभिलेख केन्द्रों की स्थापना की, वैज्ञानिक सम्मेलनों का आयोजन किया, और प्रौद्योगिकी संचार, जोखिम संचार, नवाचारों की विचारधारा और अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग आदि से संबंधित विशेष कार्यक्रम प्रारंभ किए।

 

डॉ. पटैरिया के विज्ञान संचार, प्रेरणादायक अनुसंधान, नवाचार, प्रबंधन, संचालन और नीति विकास   की दिशा में नवाचारी प्रयासों से सार्थक परिणाम प्राप्त हुए हैं जिससे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परितंत्र की वृद्धि एवं विकास की दिशा में प्रगति हुई है। डॉ. पटैरिया ने जैवप्रौद्योगिकी, पर्यावरण और विज्ञान संचार पर पुस्तकें लिखी हैं, इसके अलावा शेयरिंग साइंस एवं साइंस मीट्स कम्यूनिकेशन जैसी लोकप्रिय पुस्तकों का सह-संपादन किया है। इन्होंने बड़ी तादाद में उच्चस्तरीय अनुसंधान एवं लोकप्रिय विज्ञान के प्रकाशन भी निकाले हैं।

 

डॉ. पटैरिया वैज्ञानिक प्रौन्नति एवं सामाजिक सांस्कृतिक उत्कृष्टता के लिए विज्ञान, संचार-माध्यमों, शासन तथा जनसामान्य को संचार के एक सूत्र में पिरोने की संकल्पना पर कार्यरत हैं। डॉ. पटैरिया के प्रयासों ने भारत को मुख्य रूप से वैश्विक विज्ञान संचार परिदृश्य में प्रमुख स्थान दिलाया है। ये पब्लिक कम्युनिकेशन ऑफ साइंस एंड टैक्नोलॉजी (पीसीएसटी), अन्तर्राष्ट्रीय नेटवर्क, आस्ट्रेलिया की वैज्ञानिक समिति के सदस्य रहे हैं, इंडियन जर्नल ऑफ साइंस कम्यूनिकेशन के संस्थापक संपादक तथा भारतीय विज्ञान लेखक संघ के अध्यक्ष रहे हैं। डॉ. पटैरिया कोरिया गणराज्य चंगनम राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में वैश्विक संचार के विजिटिंग (अतिथि) प्रोफेसर रहे हैं। इसके अलावा ये भारत एवं विदेश में विभिन्न अनुसंधान पत्रिकाओं के संपादक मंडल में भी शामिल हैं। अभी हाल ही में इन्हें विज्ञान संचार पर अंतर्राष्ट्रीय इंटर एकैडमी ग्रुप का वाइस चेयर चुना गया जो वैश्विक स्तर पर विज्ञान संचार के क्षेत्र में भारत के अग्रणी नेतृत्व को स्थापित करता है।